National Engineers Day 2026: हर साल 15 सितंबर का दिन भारत में बेहद खास माना जाता है क्योंकि इस तारीख को देश भर में नेशनल इंजीनियर्स डे यानी राष्ट्रीय अभियंता दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह विशेष अवसर महान इंजीनियर और देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से अलंकृत सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती की याद में मनाया जाता है। उनके जीवन और कृत्यों से हर युवा इंजीनियर को प्रेरणा मिलती है, जिन्होंने अपनी दूरदर्शिता से भारत के बुनियादी ढांचे को एक नई दिशा दी थी।
बात करें उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि की, तो सर एम. विश्वेश्वरैया ने सिविल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में महारत हासिल की थी। उनका जन्म 15 सितंबर 1861 को कर्नाटक के कोलार जिले में हुआ था। विज्ञान और तकनीक के प्रति उनके गहरे लगाव ने उन्हें साल 1883 में पुणे के प्रतिष्ठित साइंस कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया, जिसके बाद उन्होंने अपनी बेहतरीन प्रशासनिक और तकनीकी क्षमता से सरकारी सेवा में कदम रखा।
सर विश्वेश्वरैया केवल एक अभियंता ही नहीं बल्कि एक कुशल प्रशासक भी थे, जिन्होंने वर्ष 1912 से 1918 तक मैसूर के दीवान के रूप में अपनी सेवाएं दीं। उनके कार्यकाल के दौरान शिक्षा, आधुनिक उद्योगों और जल प्रबंधन के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई, जिसके चलते उन्हें आधुनिक मैसूर का निर्माता भी कहा जाता है। उनके द्वारा किए गए विकास कार्यों की गूंज आज भी पूरे देश में सुनाई देती है और उनके प्रशासनिक मॉडल को कई जगह अपनाया जाता है।
देश निर्माण में उनके पांच सबसे बड़े योगदानों की बात करें तो, सबसे पहला नाम कावेरी नदी पर बने प्रसिद्ध कृष्णराज सागर बांध का आता है, जिससे सिंचाई और पेयजल संकट काफी हद तक दूर हुआ। दूसरा, उन्होंने पुणे के खडकवासला जलाशय में स्वचालित जल फ्ल्डगेट्स की आधुनिक तकनीक विकसित की। तीसरा, उन्होंने हैदराबाद शहर को भयंकर बाढ़ से सुरक्षित रखने के लिए एक बेहतरीन ड्रेनेज और वाटर मैनेजमेंट सिस्टम तैयार किया था।
इसके अलावा उनके चौथे बड़े योगदान में भद्रावती आयरन एंड स्टील वर्क्स और मैसूर सोप फैक्ट्री जैसे बड़े उद्योगों की स्थापना शामिल है, जिन्होंने औद्योगिक क्रांति को बढ़ावा दिया। पांचवां और सबसे महत्वपूर्ण कार्य शिक्षा के क्षेत्र में था, जहाँ उन्होंने साल 1917 में कर्नाटक में पहले इंजीनियरिंग कॉलेज की नींव रखी, जो आज यूनिवर्सिटी विश्वेश्वरैया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के नाम से जाना जाता है। उनके इन महान कार्यों को देखते हुए साल 1955 में उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया था।











