Delhi News: कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की आगामी आत्मकथा ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ को लेकर राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। इस किताब के प्रकाशन को लेकर अब नए विवाद ने जन्म ले लिया है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गहलोत का दावा है कि प्रकाशक संस्थान सोनिया गांधी की किताब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और चीन द्वारा किए गए कथित अतिक्रमण से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं को हटवाना चाहता था।
अशोक गहलोत ने अपने बयान में कहा है कि जब सोनिया गांधी ने किताब में किसी भी प्रकार के संपादकीय बदलाव करने से साफ इनकार कर दिया, तो प्रकाशक ने भारत में इस किताब को प्रकाशित करने से अपने कदम पीछे खींच लिए। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि यह अभिव्यक्ति की आजादी पर सीधा हमला है और इसके पीछे किसी बड़े राजनीतिक दबाव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। पार्टी के अन्य नेताओं ने भी इस घटनाक्रम पर चिंता व्यक्त करते हुए सवाल उठाए हैं कि यदि अन्य देशों में किताब का प्रकाशन हो रहा है, तो भारत में इसे रोकने का वास्तविक कारण क्या है।
इस विवाद के बढ़ने के बाद पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया ने भी सोशल मीडिया के जरिए अपनी सफाई पेश की है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वह भारत में इस किताब की प्रकाशक नहीं है। हालांकि, संस्थान ने यह भी माना कि एक प्रकाशक के तौर पर लेखक के तथ्यों की जांच करना और उन्हें सही सलाह देना उनका अधिकार और जिम्मेदारी है। पेंग्विन ने इसे प्रकाशन प्रक्रिया का एक सामान्य हिस्सा बताते हुए कहा कि लेखक के साथ हुई किसी भी गोपनीय चर्चा या निर्णय पर वे सार्वजनिक रूप से कोई और टिप्पणी नहीं करेंगे।
इस मामले पर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि क्या प्रकाशक अब यह तय करेंगे कि देश की एक वरिष्ठ हस्ती को अपनी किताब में क्या लिखना चाहिए और क्या नहीं। कमलनाथ ने इस स्थिति को लोकतंत्र के लिए चिंताजनक बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रकाशक के इस कदम के पीछे किसी बाहरी दबाव का प्रभाव साफ नजर आता है, जो लेखकों की स्वतंत्रता को प्रभावित करने की कोशिश है।
फिलहाल, भारत में इस किताब के प्रकाशन को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हो सकी है। हालांकि, अमेज़न जैसे प्लेटफॉर्म्स पर इसके ई-बुक वर्जन की प्री-ऑर्डर बुकिंग शुरू हो चुकी है, जिसे हार्पर कॉलिन्स यूके के तहत प्रकाशित किया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है, क्योंकि कांग्रेस इस मुद्दे को अभिव्यक्ति की आजादी और राजनीतिक सेंसरशिप से जोड़कर आगे बढ़ाने की तैयारी में दिख रही है।
Author: Shivam Verma
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