Delhi News: पेट्रोल और एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब हवाई यात्रा भी महंगी पड़ सकती है। सरकार ने घरेलू एयरलाइंस के लिए नई प्राइस स्टेबलाइजेशन स्कीम लागू की है, जिसके तहत एयरलाइंस तीन साल तक के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें तय कर सकेंगी। इसी बीच सरकारी फ्यूल रिटेलर्स ने जेट फ्यूल की कीमतों में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि भी कर दी है।
नई व्यवस्था के तहत जो घरेलू एयरलाइंस इस स्वैच्छिक योजना का हिस्सा बनेंगी, उन्हें एटीएफ के लिए 115 रुपये प्रति लीटर की निश्चित कीमत चुकानी होगी। इससे पहले यह कीमत 104.927 रुपये प्रति लीटर थी।
योजना से बाहर रहने वाली एयरलाइंस पर क्या असर होगा?
जो एयरलाइंस इस फ्रेमवर्क का हिस्सा नहीं बनेंगी, वे बाजार आधारित दरों पर ही ईंधन खरीदती रहेंगी। वर्तमान में ये दरें लगभग 142 रुपये प्रति लीटर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस द्वारा चुकाई जाने वाली कीमतों के बराबर बताई जा रही हैं।
सूत्रों के अनुसार यह योजना पूरी तरह वैकल्पिक है और इसमें शामिल होने या न होने का निर्णय एयरलाइंस स्वयं लेंगी। योजना में शामिल एयरलाइंस को लॉक-इन अवधि के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन कीमतों के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा मिलेगी। दूसरी ओर, योजना से बाहर रहने वाली एयरलाइंस को कीमतों में गिरावट का लाभ तो मिल सकता है, लेकिन कीमतों में बढ़ोतरी होने पर अतिरिक्त बोझ भी उन्हें ही उठाना पड़ेगा।
क्या है फिक्स्ड प्राइसिंग फॉर्मूला?
सरकार द्वारा निर्धारित फिक्स्ड प्राइसिंग फॉर्मूला 86.32 रुपये प्रति लीटर के ‘फ्री-ऑन-बोर्ड’ (FOB) बेंचमार्क पर आधारित है। इसमें एयरपोर्ट शुल्क, तेल कंपनियों का मार्जिन और लागू कर भी शामिल हैं।
इस फॉर्मूले के अनुसार दिल्ली में एटीएफ की प्रभावी कीमत 115 रुपये प्रति लीटर, मुंबई में 114.5 रुपये प्रति लीटर और चेन्नई में 139 रुपये प्रति लीटर होगी।
वैश्विक बाजार में बढ़ती कीमतों के बीच उठाया गया कदम
सरकार का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब वर्ष की शुरुआत में पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में वृद्धि देखी गई। इसके बावजूद दिल्ली में घरेलू एटीएफ की कीमतें दो महीने से अधिक समय तक लगभग 105 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर बनी रहीं।
रिपोर्टों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर न डालने के कारण सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ा था।
10,000 करोड़ रुपये के प्राइस स्टेबलाइजेशन फ्रेमवर्क को मंजूरी
इन नुकसानों की भरपाई करने और भविष्य में एविएशन सेक्टर को वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाने के उद्देश्य से केंद्रीय कैबिनेट ने 10,000 करोड़ रुपये के प्राइस स्टेबलाइजेशन फ्रेमवर्क को मंजूरी दी है।
इस व्यवस्था के तहत यदि वैश्विक बेंचमार्क कीमतें 86.32 रुपये प्रति लीटर के आधार मूल्य से ऊपर जाती हैं, तो सरकार अंतर की भरपाई के लिए ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को बिना ब्याज के अग्रिम राशि उपलब्ध कराएगी। वहीं जब अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट आएगी, तब अतिरिक्त राशि की वसूली कर उसे भारत के कंसोलिडेटेड फंड में वापस जमा कराया जाएगा।
हवाई यात्रा की लागत पर पड़ सकता है असर
एटीएफ किसी भी एयरलाइन की परिचालन लागत का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ऐसे में जेट फ्यूल की कीमतों में वृद्धि और नई मूल्य व्यवस्था का असर आने वाले समय में हवाई टिकटों की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है। एयरलाइंस द्वारा लागत प्रबंधन के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर यात्रियों की जेब पर पड़ने वाला प्रभाव निर्भर करेगा।
Author: Shivam Verma
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