UBT Shiv Sena Crisis: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के भीतर जारी असंतोष अब खुलकर सामने आता दिखाई दे रहा है। गुरुवार को पार्टी द्वारा जारी व्हिप के बाद बुलाई गई महत्वपूर्ण बैठक में कुल 9 सांसदों में से केवल 3 सांसदों की मौजूदगी ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
बैठक में कम संख्या में सांसदों की उपस्थिति को पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इसी बीच, उद्धव गुट के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत के एक बयान ने पूरे घटनाक्रम को नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है।
व्हिप बैठक में पहुंचे केवल तीन सांसद
पुरानी संसद भवन में आयोजित इस आपातकालीन बैठक में केवल अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे ही शामिल हुए। पार्टी नेतृत्व के प्रति अपनी निष्ठा जताने वाले इन सांसदों की मौजूदगी के बीच बाकी छह सांसद बैठक से अनुपस्थित रहे।
बैठक के बाद नेताओं ने स्पष्ट किया कि पार्टी के निर्देशों की अनदेखी करने वाले सांसदों के खिलाफ जल्द ही कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, अनुपस्थित सांसदों को नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है।
बागी सांसदों पर कार्रवाई की तैयारी
जानकारी के मुताबिक, बुधवार को ही पार्टी की ओर से ईमेल, व्हाट्सऐप और व्यक्तिगत रूप से तीन लाइन का नोटिस भेजा गया था। इसका उद्देश्य सांसदों को पार्टी बैठक में शामिल होने का निर्देश देना था।
पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि सांसद पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ दलबदल कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। उद्धव गुट के नेताओं का मानना है कि संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाना आवश्यक है।
शरद पवार के समर्थन का संजय राउत ने किया दावा
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में संजय राउत ने दावा किया कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार ने उन्हें फोन कर समर्थन जताया है। राउत के अनुसार, पवार ने पार्टी से बगावत करने वालों के खिलाफ सख्त राजनीतिक लड़ाई लड़ने की बात कही है।
राउत ने यह भी दावा किया कि शरद पवार ने बागी सांसदों के संसदीय क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन करने और जनता के बीच जाकर उनके खिलाफ अभियान चलाने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि पवार ने उद्धव ठाकरे के साथ मिलकर संबंधित क्षेत्रों में रैलियां करने का भी आश्वासन दिया है।
हालांकि, इस संबंध में शरद पवार या उनकी पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
छह सांसदों ने स्पीकर को सौंपा सहमति पत्र
बैठक से अनुपस्थित रहने वाले सांसदों में नागेश आष्टीकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजेनिंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल हैं।
अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, इन छह सांसदों ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने के लिए एक साझा सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। बताया जा रहा है कि यह पत्र लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी सौंप दिया गया है।
स्पीकर कार्यालय में पूरी होगी कानूनी प्रक्रिया
हालांकि, सांसदों का प्रस्तावित विलय अभी अंतिम रूप नहीं ले पाया है। सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय को मामले की जांच और पुष्टि के लिए सभी सांसदों की व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक होगी।
राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह प्रक्रिया पूरी हो सकती है। यदि ऐसा होता है तो उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना (यूबीटी) गुट को एक और बड़ा राजनीतिक झटका लग सकता है।
Author: Shivam Verma
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