World News: नेपाल के रसुवा जिले में तिब्बत की सीमा से आई अचानक भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। भोटेकोशी नदी में पानी का जलस्तर बढ़ने से टिमुरे बाजार और रसुवागढ़ी कस्टम क्षेत्र पूरी तरह से जलमग्न हो गए हैं। इस आपदा की चपेट में आने से बड़ी संख्या में वाहन, कीमती सामान और स्थानीय निवासियों की संपत्ति बह गई है। स्थानीय प्रशासन ने इस घटना को एक बड़ी प्राकृतिक त्रासदी करार दिया है, जिससे क्षेत्र का बुनियादी ढांचा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है।
आपदा की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बाढ़ के तेज बहाव ने न केवल रिहायशी इलाकों को अपनी चपेट में लिया, बल्कि नेपाल पुलिस के तीन महत्वपूर्ण कार्यालयों को भी नुकसान पहुंचाया है। टिमुरे, स्याफ्रुबेसी और रसुवागढ़ी स्थित पुलिस चौकियों के प्रभावित होने के बाद राहत और बचाव कार्य में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, कई जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान हुआ है, जिससे बिजली आपूर्ति और अन्य बुनियादी सेवाएं बाधित होने का खतरा बढ़ गया है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए काठमांडू उपत्यका ट्रैफिक पुलिस ने रसुवा, नुवाकोट, चितवन और धादिङ की ओर जाने वाले सभी प्रकार के वाहनों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में नेपाली सेना के दो हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं ताकि फंसे हुए लोगों को एयरलिफ्ट किया जा सके। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन की एक आपातकालीन बैठक बुलाई है और वे खुद जिलाधिकारियों के साथ मिलकर जमीनी हालात पर सीधी नजर बनाए हुए हैं।
गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के तटीय इलाकों में रह रहे परिवारों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी के किनारों को खाली कर सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं। मुग्लिन और नारायणगढ़ जैसे संवेदनशील मार्गों पर यात्रा न करने की सलाह दी गई है। किसी भी आपातकालीन स्थिति के लिए सरकार ने टोल-फ्री नंबर 1234 जारी किया है, ताकि आपदा प्रभावित लोग तुरंत मदद मांग सकें।
फिलहाल, सरकार की मुख्य प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना और उन तक भोजन व दवा जैसी आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाना है। रसुवा, नुवाकोट, धादिङ, गोरखा और चितवन जिलों के निवासियों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। मौसम विभाग और प्रशासन लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं ताकि जान-माल की हानि को कम किया जा सके और पुनर्वास की प्रक्रिया को जल्द से जल्द शुरू किया जा सके।











