Chandauli News: उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले की अति पिछड़ी और पहाड़ी नौगढ़ तहसील में धान की रोपाई की तैयारियों के बीच सिंचाई का गंभीर संकट किसानों की चिंता बढ़ा रहा है। जून का आधा महीना बीत चुका है और मानसून की आहट भी सुनाई देने लगी है, लेकिन क्षेत्र के किसान पानी, बिजली, डीजल और खाद-बीज जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
न्यूजट्रैक से बातचीत में चकिया विधानसभा के पूर्व विधायक जितेंद्र कुमार एडवोकेट और स्थानीय किसानों ने क्षेत्र की जमीनी हकीकत को सामने रखते हुए प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े किए हैं।
दावों और जमीनी स्थिति के बीच बड़ा अंतर
पूर्व विधायक जितेंद्र कुमार एडवोकेट का कहना है कि सरकार और प्रशासन की ओर से किसानों की आय बढ़ाने, समय पर उन्नत बीज उपलब्ध कराने, पर्याप्त खाद देने और निर्बाध बिजली-पानी की व्यवस्था के दावे किए जाते हैं। हालांकि नौगढ़ जैसे सुदूर और पहाड़ी क्षेत्रों में इन दावों का असर धरातल पर दिखाई नहीं देता।
धान की रोपाई का महत्वपूर्ण समय नजदीक है, लेकिन किसान अब भी सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी का इंतजार कर रहे हैं। किसानों को आशंका है कि यदि समय रहते व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ तो उनकी मेहनत और निवेश दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
कूड़ा राजवाहा नहर से टेल तक नहीं पहुंचता पानी
नौगढ़ तहसील के ग्राम देवखत के किसान राजनाथ सिंह यादव ने क्षेत्र की प्रमुख सिंचाई व्यवस्था ‘कूड़ा राजवाहा’ नहर की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि नौगढ़ क्षेत्र की सिंचाई के लिए छोड़ा जाने वाला पानी अंतिम छोर यानी टेल तक नहीं पहुंच पाता।
राजनाथ सिंह यादव के अनुसार, नहर में पानी छोड़ा तो जाता है, लेकिन वह टेल तक पहुंचने से पहले ही समाप्त हो जाता है। पानी की कमी के कारण हर वर्ष फसलों को नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार अधिकारियों के समक्ष आवाज उठाई गई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है।
बंद पड़ी लिफ्ट कैनाल से बढ़ी किसानों की परेशानी
पहाड़ी और पथरीले भूभाग वाले नौगढ़ क्षेत्र में सिंचाई के लिए लिफ्ट कैनाल महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। क्षेत्र में स्थापित दो बड़ी लिफ्ट कैनाल का उद्देश्य संकट के समय किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाना है।
स्थानीय किसानों और पूर्व विधायक के अनुसार, धान की नर्सरी तैयार करने और बीज बोने के इस महत्वपूर्ण दौर में दोनों लिफ्ट कैनाल बंद या बदहाल स्थिति में पड़ी हैं। उनका कहना है कि विभागीय अधिकारियों को कई बार लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया गया, लेकिन मरम्मत या संचालन की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
गाद से भरी नहरें और बंधियां, जल संरक्षण पर संकट
नौगढ़ क्षेत्र में जल संरक्षण और सिंचाई के लिए छोटी-छोटी बंधियां तथा सहायक नहरें बनाई गई हैं। नियमों के अनुसार मानसून से पहले इनकी सिल्ट सफाई कराना आवश्यक होता है ताकि वर्षा जल का संचयन बेहतर तरीके से हो सके।
किसानों का आरोप है कि क्षेत्र की अधिकांश बंधियां और नहरें गाद और मिट्टी से भर चुकी हैं। सफाई के अभाव में उनकी जल भंडारण क्षमता प्रभावित हो गई है। ऐसे में भारी बारिश होने पर भी पानी का समुचित उपयोग नहीं हो सकेगा और बड़ी मात्रा में पानी व्यर्थ बह जाएगा।
किसानों की समस्याओं पर बैठकों में नहीं मिलती प्रतिनिधित्व की जगह
स्थानीय किसानों ने प्रशासनिक बैठकों की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। किसान राजनाथ सिंह यादव का आरोप है कि कृषि विभाग या ब्लॉक स्तर पर आयोजित बैठकों में वास्तविक किसानों को शामिल नहीं किया जाता।
उनके अनुसार, बैठकों में प्रायः चुनिंदा लोगों या प्रभावशाली व्यक्तियों को बुलाया जाता है, जिससे खेतों से जुड़ी वास्तविक समस्याएं अधिकारियों तक नहीं पहुंच पातीं। परिणामस्वरूप टेल तक पानी न पहुंचने, लिफ्ट कैनाल के बंद रहने और अन्य स्थानीय मुद्दों पर प्रभावी चर्चा नहीं हो पाती।
बिजली, डीजल और खाद-बीज की समस्या से बढ़ी लागत
सिंचाई संकट के साथ किसानों को अन्य चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की रोस्टिंग और अघोषित कटौती के कारण ट्यूबवेल संचालन प्रभावित हो रहा है। वहीं पंपसेट का उपयोग करने वाले किसानों पर महंगे डीजल का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है, जिससे खेती की लागत बढ़ गई है।
इसके अलावा किसानों का कहना है कि समितियों पर समय से उन्नत किस्म के बीज और खाद उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। इससे किसानों को बाजार से अधिक कीमत पर कृषि सामग्री खरीदनी पड़ रही है, जबकि कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
समय रहते समाधान की मांग
पूर्व विधायक जितेंद्र कुमार एडवोकेट और क्षेत्र के किसानों ने जिला प्रशासन तथा उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने से पहले नौगढ़ क्षेत्र की सभी नहरों और बंधियों की सफाई कराई जाए। साथ ही बंद पड़ी लिफ्ट कैनाल को तत्काल चालू कर किसानों को रोपाई के लिए पर्याप्त पानी और बिजली उपलब्ध कराई जाए।
किसानों का कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो नौगढ़ क्षेत्र के हजारों किसानों की इस वर्ष की खेती और उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
Author: Shivam Verma
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