Excise Policy Case: दिल्ली के कथित शराब घोटाले से जुड़े मामले की सुनवाई अब नई बेंच के पास पहुंच गई है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खुद को मामले से अलग करने के बाद यह केस जस्टिस मनोज जैन की अदालत में ट्रांसफर कर दिया गया है। वहीं, आपराधिक अवमानना मामले की सुनवाई जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडेजा की खंडपीठ करेगी। दोनों मामलों की सुनवाई मंगलवार को निर्धारित की गई है।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने खुद को किया था अलग
गुरुवार को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, राज्यसभा सांसद संजय सिंह, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज, दुर्गेश पाठक और विनय मिश्रा के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया था। इसके साथ ही उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए मामले को दूसरी बेंच को ट्रांसफर किए जाने की घोषणा की थी।
अब शराब घोटाले से जुड़े इस केस की सुनवाई जस्टिस मनोज जैन करेंगे।
मंगलवार को दोनों मामलों की होगी सुनवाई
एक तरफ मंगलवार को शराब घोटाले मामले की सुनवाई नई बेंच के सामने शुरू होगी, वहीं दूसरी ओर अवमानना मामले की सुनवाई भी शुरू हो जाएगी। यह मामला जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडेजा की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है।
खंडपीठ अरविंद केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी के छह नेताओं के खिलाफ चल रही अवमानना कार्यवाही पर सुनवाई करेगी। इसके अलावा उन लोगों पर भी अदालत की नजर रहेगी जिन्होंने यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसे वीडियो अपलोड किए थे जिनमें जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणियां की गई थीं।
सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में दी चुनौती
दरअसल, फरवरी के अंत में ट्रायल कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया था। अदालत ने इस दौरान जांच एजेंसी सीबीआई पर तीखी टिप्पणियां भी की थीं और जांच अधिकारी के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे।
इसके बाद केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। मामला जब जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में सूचीबद्ध हुआ तो अरविंद केजरीवाल ने इस पर आपत्ति जताई थी।
केजरीवाल ने उठाए थे निष्पक्ष सुनवाई पर सवाल
अरविंद केजरीवाल ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर मामले को दूसरी बेंच के पास ट्रांसफर करने की मांग की थी। मांग स्वीकार नहीं होने पर उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के समक्ष रिक्यूजल याचिका दायर कर उनसे खुद को मामले से अलग करने का अनुरोध किया था।
केजरीवाल ने आशंका जताई थी कि उन्हें जस्टिस शर्मा की अदालत में न्याय नहीं मिल पाएगा। उन्होंने हितों के टकराव और आरएसएस से जुड़े एक संगठन के कार्यक्रम में शामिल होने जैसे आरोप भी लगाए थे।
हालांकि, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने रिक्यूजल याचिका खारिज कर सुनवाई जारी रखी। इसी दौरान सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ कई पोस्ट, टिप्पणियां और एडिट किए गए वीडियो साझा किए गए। अदालत ने इसका संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की और बाद में खुद को मामले की सुनवाई से अलग कर लिया।
Author: Shivam Verma
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