PM Narendra Modi: पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने हाल ही में राजनीति और पीएम मोदी के व्यक्तित्व को लेकर कई दिलचस्प बातें साझा की हैं। अपनी पुस्तक ‘प्रणब, माई फादर: ए डॉटर रिमेम्बर्स’ के प्रचार के दौरान उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं है कि आप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशंसक हों या उनसे नफरत करते हों, लेकिन आप ‘ब्रांड मोदी’ के प्रभाव को नजरअंदाज नहीं कर सकते। उन्होंने स्पष्ट किया कि मोदी का व्यक्तित्व और उनका राजनीति करने का तरीका इतना प्रभावी है कि उसे अनदेखा करना नामुमकिन है।
शर्मिष्ठा ने 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद की एक पुरानी घटना का जिक्र किया, जब प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति भवन में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलने पहुंचे थे। उस दौरान पीएम मोदी ने प्रणब दा के साथ चुनाव परिणामों और अपने विश्लेषण पर विस्तृत चर्चा की थी। शर्मिष्ठा ने बताया कि उनके पिता ने मोदी से पूछा था कि तीन दशक बाद किसी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिलना भारतीय राजनीति के लिए क्या मायने रखता है। उस बातचीत में पीएम मोदी की विनम्रता और उनकी सोच की गहराई स्पष्ट रूप से झलक रही थी।
मुखर्जी के अनुसार, 2014 का लोकसभा चुनाव भारतीय इतिहास में बेहद खास था। उन्होंने बताया कि उस चुनाव में पहली बार किसी नेता को प्रधानमंत्री पद के चेहरे के रूप में इतने बड़े स्तर पर पेश किया गया था। यद्यपि प्रणब मुखर्जी और पीएम मोदी के राजनीतिक दल अलग-अलग थे, लेकिन फिर भी दोनों के बीच हमेशा गहरा सम्मान और मधुर संबंध रहे। शर्मिष्ठा ने इसे स्वस्थ लोकतंत्र की एक बड़ी मिसाल करार दिया है, जहां वैचारिक मतभेद व्यक्तिगत रिश्तों में कभी बाधा नहीं बने।
शर्मिष्ठा ने एक और भावुक पल को याद करते हुए बताया कि जब 2014 में पीएम मोदी पहली बार संसद भवन पहुंचे थे, तो उन्होंने सीढ़ियों पर झुककर प्रणाम किया था। यह दृश्य करोड़ों भारतीयों के दिलों को छू गया था। उन्होंने कहा कि मोदी ने अपनी जमीनी स्तर की रणनीतियों और जनता के साथ सीधे जुड़ाव के कारण ही भारतीय राजनीति में अपनी एक अलग पहचान बनाई। शर्मिष्ठा मानती हैं कि भाजपा की ऐतिहासिक जीत में मोदी का चेहरा सबसे मजबूत ट्रंप कार्ड साबित हुआ।
लेखिका ने अपनी बात रखते हुए यह भी स्वीकार किया कि पीएम मोदी की कार्यशैली और गलतियों को समय पर पहचानकर उनमें सुधार करने की क्षमता ही उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती है। उनके अनुसार, मोदी का प्रभाव केवल पार्टी तक सीमित नहीं है, बल्कि वह भारतीय मतदाताओं के एक बड़े वर्ग के साथ सीधे संवाद करने में सक्षम हैं। शर्मिष्ठा की इन टिप्पणियों ने एक बार फिर भारतीय राजनीति के उस दौर और मोदी के शुरुआती दिल्ली सफर की यादों को ताजा कर दिया है।











